Dr. Mohammad Hanif Khan Shastri

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ– मुहम्मद हनीफ’ खान शास्त्री, 21–09–1951 को कस्बा दुद्धी जिला–सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में माता सुन्नत अदा और पिता जुगनू अली के घर पैदा हुए । इंटर और बी.ए. की शिक्षा राजकीय विद्यालय और महाविद्यालय कस्बा दुद्धी में ही हासिल करने के पश्चात् काशी विद्यापीठ से एम. ए. और कामेश्वर सिंह दरभंगा (बिहार) संस्कृत विश्वविद्यालय से पुराण में आचार्य और तुलनात्मक धर्मशास्त्र में विद्यावारिधि पी.एच.डी. की उपादधि प्राप्त की ।
26 नवम्बर सन् 1982 में राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली में अनुदेशक का पदभार संभाला और 30 सितम्बर 2016 को सहायक आचार्य पद से अवकाश प्राप्त किया । 24–02–1994 को माननीय डॉ. शंकर दयाल शर्मा, राष्ट्रपति जी ने शास्त्री की उपाधि से सम्मानित किया । तभी से इनके नाम में ‘शास्त्री’ शब्द जुड़ गया ।
इन्हें अनेकानेक सम्मान मिले हैंं । जिनमें से मुख्य हैं-वेदांग विद्वान् सम्मानµ सन् 2003 में मानव संसाधान विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया । राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव सम्मान सन् 2009 को भारत के प्रधानमन्त्री और उपराष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया । राष्ट्रीय प्रतिष्ठा सम्मान सन् 2011 में कांची कामकोटि पीठाधीश शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी के द्वारा दिया गया । भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री की उपाधि से सम्मानित ।
इनकी 15 रचनाओं में से मुख्य हैंµवेद और कुरआन सेµमहामंत्र गायत्री ओर सुरह फातिहा, मोहन गीता, श्रीमद्भगवद् गीता और कुरान में सामंजस्य, श्रीमद्भगवद् गीता और इस्लाम, महासागर संगम (वेद उपनिषद् और कुरआन का समान अध्यायन) ।
भारतीयता से सम्पन्न चारों धामों की यात्रा तथा हज करने वाले एकमात्र मुस्लिम विद्वान हैं ।