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Yaha Pani Thahar Gaya Hai: Rajya Aur Rajniti

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यदि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन कर पाने में सफल होती है तो संभावना है कि राहुल गांधी देश के नए प्रधानमंत्री बना दिए जाएं । इस सबके मध्य इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में उत्तर प्रदेश की सियासी लड़ाई छाई हुई है । पंजाब, उत्तराखंड और थोड़ा–बहुत गोवा भी स्थान पा रहा है लेकिन उत्तर पूर्व पूरी तरह उपेक्षित है । यहां मणिपुर में भी विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं । पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर आधारित इस चुनाव की बाबत कहीं कुछ पढ़ने को नहीं मिल रहा । हिन्दी अखबारों में कम से कम बिल्कुल नहीं । हिन्दी के इलेक्ट्रॉनिक चैनलों का भी यही हाल है । अंग्रेजी अखबारों से यदा–कदा कुछ–कुछ जानकारी मिल जाती है । मुख्यधारा द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों की उपेक्षा का ही नतीजा है कि यहां भारत सरकार के निजाम पर उग्रवादी संगठन भारी पड़ रहे हैं । सच तो यह है कि मुख्यधारा का भारतीय अपने ही देश के इन हिस्सों से इस हद तक कटा है कि मणिपुर में होने वाले चुनाव के प्रति उसका रवैया पूरी तरह उदासीन है । मैं स्वयं इस तथ्य से अवगत नहीं था कि मणिपुर पहला ऐसा राज्य है जहां आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में सभी को मताधिकार का मौका दिया गया था । जून 1948 में यहां चुनाव कराए गए थे । तब तक यहां राजशाही थी जिसका भारत के साथ विलय नहीं हुआ था । 15 अक्टूबर 1949 को भारतीय संघ के साथ मणिपुर कका विलय हुआ । कांग्रेस ने इस विलय का स्वागत किया था जिसका लाभ उसे मिला । यहां ज्यादातर कांग्रेस का ही शासन रहा है । वर्तमान में कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार जिसका नेतृत्व ओंकराम अयूबी सिंह कर रहे हैं, पिछले 10 वर्षों से सत्ता में है । यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस की गठबंधन सरकार है ।

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