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101 Shikshaprad Kahaniya

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आज एक जमाना याद आता है । शाम को जब अंधेरा घिरने को होता, बच्चे अपना खेल समाप्त कर घर आते, घर आकर खाना खाते और फिर शुरू होता कहानी सुनने–सुनाने का सिलसिला । लगभग सभी बच्चे अपने नाना–नानी, दादा–दादी से कहानी सुनने की जिद करते और सच तो यह है कि कहानी सुनते–सुनते बच्चे गहरी नींद में सो जाया करते थे । लेकिन आज मात–पिता की भागदौड़ भरी जीवन शैली और टूटते संयुक्त परिवार के कारण ऐसा सौभाग्य बच्चों को नहीं मिलता कि कहानी सुनते–सुनते सौ जाएं । तो उसी कमी को पूरा करने के लिए हमें इन कहानियों का संकलन किया है । आशा है ये कहानियां बच्चों, किशोरों, युवकों के साथ–साथ बड़ों के लिए भी बड़ी लाभदायक और प्रेरणादायक सिद्ध होंगी ।

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