Sunil Yadav
ऊर्जावान–धारदार युवा आलोचक और सम– सामयिक सामाजिक मुद्दों पर अपनी लेखनी से तीखे प्रहार करने वाले सुनील यादव का जन्म 29 दिसंबर 1983 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर ज़िले के करकापुर गाँव में हुआ । प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही सम्पन्न हुई । उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की । इन्होंने ‘राही मासूम रजा और शानी के उपन्यासों में मुस्लिम सामाजिक परिवेश’ विषय पर महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की– सुनील सक्रिय लेखनकर्म के साथ–साथ सामाजिक–न्याय की पक्षधरता के लिए विभिन्न मोर्चों पर दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं । सोशल मीडिया के माध्यम से शोषितों की आवाज़ को साधारण जन की चेतना तक पहुंचाने में गहरी दिलचस्पी रखने वाले इस युवा लेखक ने पिछले अनेक वर्षों में सड़ी–गली सामंती रूढ़ियों, जातिवादी पूर्वाग्रहों और सत्ता पर काबिज़ वर्णवादियों की विकृत मानसिकताओं और प्रवृत्तियों पर जोरदार हमला किया है । सुनील की फेसबुक टिप्पणियां स्वतंत्र लेखों की तरह पढ़ी और सराही जाती रही हैं । जनसत्ता, हिंदुस्तान, जनसंदेश टाइम्स, जैसे समाचार–पत्रों तथा हंस, पहल, पक्षधर, समसामयिक सृजन, समकालीन सरोकार, समकालीन जनमत, मड़ई, गाँव के लोग जैसी पत्रिकाओं में अब तक उनके 70 से ज्यादा लेख प्रकाशित । समसामयिक सृजन के चर्चित लोक विशेषांक का संयोजन किया ।
संपर्क : ग्राम–करकापुर, पोस्ट अलावलपुर, जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश ।
चलितभाष : 76549 12295
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