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Yudh Morchon Se
‘युद्ध मोर्चों से’ पुस्तक में मैंने ऐसे 14 रोचक सैन्य संस्मरण और रिपोर्ताज साझा किए गए हैं, जो निश्चय ही पाठकों को रोमांचित करने वाले हैं। मैंने बतौर रक्षा संवाददाता देश भर के तकरीबन सभी अग्रिम मोर्चों पर, चाहे वह थल सीमा हो या समुद्री सीमा, या फिर वायुसेना के दुर्गम हवाई अड्डे, वहां रिपोर्टिग के सिलसिले में यात्राएं की हैं। रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से एक माह का डिफेंस करेस्पॉन्डेट कोर्स (डीसीसी) करने के दौरान मुझे राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी (एनडीए), पुणे, टैंक म्यूजियम और आर्मर्ड कार्प्स सेंटर एंड स्कूल, अहमदनगर (महाराष्ट्र), भारतीय नौसेना के पश्चिम कमान मुख्यालय, मुम्बई, नौसेना का ट्रेनिंग प्रतिष्ठान ‘आई.एन.एस. शिवाजी’, लोनावला, अरब सागर में युद्धपोतों पर, पनडुब्बी में, एयरफोर्स स्टेशन, लोहेगांव और एलओसी (जम्मू-कश्मीर) पर सेना के साथ बंकर में रहने का रोमांचकारी अनुभव मिला है। इस दौरान हमनें एनडीए में कुछ दिन देश के भावी योद्धाओं के साथ भी बिताए और देखा कि एक किशोर बालक कैसे सशस्त्र बलों में तैनाती पर जाने से पहले कठोर ट्रेनिंग से गुजर कर अपने आपको फौलाद में तब्दील करता है। वहां हमनें गजब का अनुशासन देखा और महसूस किया। एनडीए परिसर में स्थित मार्केट में सिर्फ एक ही सैलून है। मुझे भी हजामत बनवाने की जरूरत महसूस हुई तो कुछ प्रतिभागी पत्रकार दोस्तों के साथ सैलून में पहुँच गया। कुछ कैडेट अपनी हजामत (मिलिटरी कटिंग) बनवा रहे थे। और बहुत ही सम्मान के भाव से उम्रदराज नाई से पेश आ रहे थे। पता चला कि उस नाई ने कितने भावी जनरलों की हजामत बनाई है और उस व्यक्ति को इस बात का फक्र भी है। उन्होंने बातचीत में उन कैडेटो के नाम लिए, जिनके उन्होंने बाल काटे थे और वे भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने में कामयाब हुए। - संजय सिंह‘युद्ध मोर्चों से’ पुस्तक में मैंने ऐसे 14 रोचक सैन्य संस्मरण और रिपोर्ताज साझा किए गए हैं, जो निश्चय ही पाठकों को रोमांचित करने वाले हैं। मैंने बतौर रक्षा संवाददाता देश भर के तकरीबन सभी अग्रिम मोर्चों पर, चाहे वह थल सीमा हो या समुद्री सीमा, या फिर वायुसेना के दुर्गम हवाई अड्डे, वहां रिपोर्टिग के सिलसिले में यात्राएं की हैं। रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से एक माह का डिफेंस करेस्पॉन्डेट कोर्स (डीसीसी) करने के दौरान मुझे राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी (एनडीए), पुणे, टैंक म्यूजियम और आर्मर्ड कार्प्स सेंटर एंड स्कूल, अहमदनगर (महाराष्ट्र), भारतीय नौसेना के पश्चिम कमान मुख्यालय, मुम्बई, नौसेना का ट्रेनिंग प्रतिष्ठान ‘आई.एन.एस. शिवाजी’, लोनावला, अरब सागर में युद्धपोतों पर, पनडुब्बी में, एयरफोर्स स्टेशन, लोहेगांव और एलओसी (जम्मू-कश्मीर) पर सेना के साथ बंकर में रहने का रोमांचकारी अनुभव मिला है। इस दौरान हमनें एनडीए में कुछ दिन देश के भावी योद्धाओं के साथ भी बिताए और देखा कि एक किशोर बालक कैसे सशस्त्र बलों में तैनाती पर जाने से पहले कठोर ट्रेनिंग से गुजर कर अपने आपको फौलाद में तब्दील करता है। वहां हमनें गजब का अनुशासन देखा और महसूस किया। एनडीए परिसर में स्थित मार्केट में सिर्फ एक ही सैलून है। मुझे भी हजामत बनवाने की जरूरत महसूस हुई तो कुछ प्रतिभागी पत्रकार दोस्तों के साथ सैलून में पहुँच गया। कुछ कैडेट अपनी हजामत (मिलिटरी कटिंग) बनवा रहे थे। और बहुत ही सम्मान के भाव से उम्रदराज नाई से पेश आ रहे थे। पता चला कि उस नाई ने कितने भावी जनरलों की हजामत बनाई है और उस व्यक्ति को इस बात का फक्र भी है। उन्होंने बातचीत में उन कैडेटो के नाम लिए, जिनके उन्होंने बाल काटे थे और वे भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने में कामयाब हुए। - संजय सिंह
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