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Vichar Aur Alochana

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राहुल सिंह ने आधुनिकता की अवधारणा को समझने के क्रम में एक यात्रा एक दशक पहले आरम्भ की थी । उस क्रम में वे गाहे–बगाहे इधर उधर सुस्ताते और चीजें तलाशते रहें । इस किताब में शामिल तेरह लेख उसी सं/ाान के साक्षी हैं । गाँधी और अम्बेडकर से जुड़े लेख भारतीय राजनीति में आधुनिकता के सम्भावित प्रकल्पों को तलाशने की कोशिश है, तो समकालीन मार्क्सवाद उसके वैश्विक मॉडल की परिणतियों को समझने की कोशिश है । इसी क्रम में सार्त्र के असम्भव विकल्प की तलाश को जानने की कोशिश की गयी है । और इन सबको अपने तर्इं समझते–बूझते हिन्दी साहित्य के सन्दर्भ में आधुनिकता केन्द्रित बहस की परिणतियों की ओर ध्यान दिया गया है । हिन्दी साहित्य में वामपन्थ और दक्षिणपन्थ की शिविरबन्दी ने जिन निष्पत्तियों को प्रस्तावित किया । उसे अज्ञेय, निर्मल वर्मा, धर्मवीर भारती और विजयदेव नारायण साही के चिन्तन सोपानों में देखने की कोशिश की गयी है । इनके बरक्स वामपन्थी कुनबे से जो एक व्यक्ति खड़गहस्त है, वे रामविलास शर्मा हैं । आधुनिकता विषयक उनकी समझ चिन्तन यात्रा के उत्तरार्द्ध में, उन्हें जिन सीमान्तों तक ले गई, उसमें आधुनिकता के मोर्चे पर वामपन्थ और दक्षिणपन्थ के मध्य की यह दीवार थोड़ी ढहती–सी जान पड़ती है । भारतीय आधुनिकता के सवाल पर वामपन्थ और दक्षिणपन्थ की यह विभाजक रेखा एक दूसरे में घुलने लगती है । रामविलास शर्मा जिस सवाल के जवाब पर उलझ कर रह जाते हैं, उस मोर्चे पर जरूरी मदद मैनेजर पाण्डेय उपलब्/ा कराते हैं । यह किताब आधुनिकता के सवाल के इर्द–गिर्द ली गयी उड़ानों की हवाईपट्टी है ।

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