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Sudhir Vidyarthi : Srajan Aur Sarokar
भारतीय नवजागरण की एक सशक्त धारा उन लोगों की थी जिन्होंने सशस्त्र संघर्ष से देश को आज़ाद कराने की दुर्लभ कोशिश की । यह भारत के इतिहास की विडम्बना ही है कि इस समझौताविहीन क्रांतिकारी धारा को सायास परिधि से बाहर दूर या पास रखने की कोशिश की गई । यह सुखद बात है कि अत्यंत कर्मठ और समर्पित रचनाकार सुधीर विद्यार्थी ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्यों के द्वारा अपनी एक विशिष्ट पहचान कायम की है । वे नवजागरण के एक जरूरी अध्याय को पूरा कर रहे हैं । हिन्दी के समकालीन साहित्यकारों के आत्मयुग्ध और अनेक प्रवंचनाओं से भरे इस परिदृश्य में सुधीर विद्यार्थी उन लोगों में हैं जो आत्म–प्रचार और यशाकांक्षा से अधीर हुए बिना चुपचाप इस जरूरी कार्य को संपन्न करने और विस्तार देने में लगे हैं । दरअसल उनका कार्य बीहड़ रास्तों की ओर ले जाने को पे्ररित करने वाला है । उनके लिए नवजागरण एक इतिहास स्तूप की तरह है । वे अपनी धुन में स्वाधीनता संघर्ष की उन जड़ों को सींचने में लगे हैं जो इस देश के आगे आने वाले गंभीर संकट के दिनों में नि:संदेह मजबूत आधार सिद्ध होंगे । सुधीर विद्यार्थी भी नवजागरण के रचनाकारों की तरह सिर्फ कलम चलाने वाले नहीं हैं बल्कि दूसरी गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहे हैं । वे उस क्रांतिकारी परंपरा को कायम करने की कोशिश में समर्पित संस्कृतिकर्मी हैं । उनका जीवन एक क्रांतिकारी का है और लेखन एक मिशन है–नवजागरण का मिशन! नवजागरण जैसा मिशन!
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