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Shabdo ka safarnama

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हम अपने दैनिक व्यवहार में बड़े सहज भाव से शब्दों का प्रयोग करते रहते हैं और उनकी विकास–यात्रा की और हमारा ध्यान नहीं जाता । लेकिन, ऐसा नहीं है कि ये शब्द अपने मूल रूप में ऐसे ही थे और अपने वर्तमान अर्थो में ही प्रयुक्त होते थे । अगर हम इनकी जीवन–यात्रा को देखें तो वह किसी व्यक्ति की जीवन–यात्रा की तरह रहस्य रोमांच, विचित्रि घटनाक्रमों तथा उतार–चढावों से भरी मिलेगी । जिस प्रकार किसी नदी में लुढ़कते और परस्पर टकराते–रगड़ खाते पत्थरों का मूल स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है, वैसी ही स्थिति अधिकांश शब्दों की भी होती है और उसके आरम्भिक या मूल रूप को पहचानना कठिन हो जाता है । उदाहरण के लिए अगर आप को यह पता चले कि सन् 1947 में ‘कलाशनीकोव’ नामक एवं रूसी इंजीनियर ने एक स्वचालित (रूसी में ‘अवतोगत’) राइफल का डिजाइन तैयार किया था जो ‘अवतोमत कलाशनीकोव 1947’ कहलाई और ए–के– 47 इसी का संक्षिप्त रूप है,

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