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Nadi Gayab Hai: Paryavarniya Chetna Ki Kahaniyan
प्रकृति के अनंत विस्तार में अनगिनत गतियां हैं । सूर्य, चंद्र, वायु, जल, हरीतिमा, ग्रह, नक्षत्र तथा मनुष्य आदि प्रकृति में आच्छन्न हैं । इनमें परस्पर अवलंबन समग्र रूप से प्रसूत है । मनुष्य जीवन के लिए प्राकृतिक वातावरण के मूल घटक संसाधन हैं । इन संसाधनों के स्वार्थपूर्ण दोहन से पर्यावरण की हानि हो रही है । इसलिए समस्त जीवन–रूपों के अस्तित्व के लिए अहिंसा एक अनिवार्य मूल्य है । प्रकृति के सभी अवयवों में प्रदूषण का घनत्व इतना बढ़ गया है कि देश के 50% से भी अधिक लोग रोगग्रस्त हैं । आज स्थिति यह हो गई है कि न केवल हवा बल्कि जल–स्रोत भी दूषित हो गए हैं इतना ही नहीं ध्वनि तथा भूमि प्रदूषण के दुष्परिणाम भी सामने हैं । यह समस्या इतनी जटिल हो गई है कि संपूर्ण रुप से निराकरण की असमर्थता जग–जाहिर है । ऐसे में युवा वर्ग में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना अहम कर्तव्य है । चर्चित वरिष्ठ कहानीकार एस.आर. हरनोट जी की पर्यावरणधर्मी कहानियों को पढ़ते हुए विचार कौंधा कि ऐसी कहानी जो प्रकृति के सौम्यता को, मधुमयता को भंग करने की साजिश को बेबाकी से कहती है और वर्तमान में आंचलिक जनता के द्वारा पारिस्थिकी एवं पर्यावरणीय समस्या से जूझते हुए उत्कट संघर्ष को बखूबी सामने रखती है, को शिक्षार्थियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों के अध्ययन एवं मनन के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए । आज के इंसान में पर्यावरणीय जागरूकता का अभाव है । नाटक, नुक्कड़, कहानी पाठ और गीत शैली आदि के द्वारा पर्यावरणीय संरक्षण के प्रति जाग्रति लाया जा सके । एस.आर. हरनोट जी की ये कहानियाँ सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना के द्वारा समाज में पर्यावरणीय एकरुपात्मक संवेदनशीलता ग्रहण कर प्राकृतिक अवयवों के संरक्षण की अति–आवश्यकता पर बल देती हैं । अत: कठोर सत्य से आँखे मूंदकर स्वर्ग के तारों की गिनती नैतिक एवं सामाजिक पलायन है ।
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