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Mohandas Namishray: Chuni Hui Kahaniya
पुरानी शताब्दी की पुरानी परंपराओं और प्रथाओं के खिलाफ दलित साहित्य के इतिहास में निश्चित ही एक उपलब्धि मानी जा सकती है दलित साहित्यकारों का समाज परिवर्तन के लिए आह्वान । नई शताब्दी आते–आते यह अच्छी तरह से जाहिर हो गया था कि दलित साहित्य सिर्फ साहित्य नहीं है बल्कि आंदोलन भी है । उस आंदोलन में साहित्य से जुड़कर समाज बदलने की ताकत भी है । वहीं साहित्य ने साथियों को जोड़ा भी । बाबा साहेब डॉ– अम्बेेडकर से प्रेरणा लेकर वैसे आजाद भारत में मुखरता से विभिन्न राज्यांे में दलित साहित्य रेखांकित हुआ है । स्वयं मोहनदास नैमिशराय लंबे समय से सामाजिक बदलाव के लिए साहित्य और आंदोलन से जुड़े हैं । उनकी साहित्यिक भागीदारी की देश–भर में पहचान भी हुई है । ‘मेरी चुनी हुई कहानियों’ के तहत नैमिशराय जी की नई और पुरानी शताब्दी मंे लिखी कहानियाँ हैं । जो राष्ट्रीय स्तर की पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुई हैं ।
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