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Hindi ke Musalman Kavi
मुसलमान जाति का हिन्दी पर कितना प्रेम था, और हिन्दी की समुन्नति में उनका कितना हाथ है, इसी बात के प्रकट करने के लिये, यह ग्रंथ संकलित हुआ है, साथ ही हिन्दी प्रेमिकों का मनोरंजन भी संकलनकार ने ग्रंथ के संकलन करने में परिश्रम किया है, अधिकांश हिन्दी मुसलमान कवियों को सुन्दर कवितायें इस ग्रंथ में सकलित हैं। उनमें आप उन ललित और सुन्दर रचनाओं को भी पायेंगे, जिनका उल्लेख मैंने जहां-तहां किया है। प्रत्येक कवि की प्राप्त जीवनी भी दी गई है, कहीं-कहीं उसमें अच्छा विश्लेषण भी है। ग्रंथ की भूमिका के लिखने में भी सहृदयता से काम लिया गया है, उसमें यत्रतत्र, मार्मिक, नूतन और हृदय ग्राहिणी बातें हैं। भूमिका में मौलिकता कम है, किन्तु संकलनकार की मधु प्रवृत्ति प्रशंसनीय है। में इस ग्रंथ का हिन्दी साहित्य संसार में अभिनन्दन करता हूं। आशा है, हिन्दी-संसार में इसका उचित आदर होगा। यदि मुसलमान सज्जनों की दृष्टि भी संग्रहकार के उद्देश्य की ओर समुचित आकर्षित हो गई, और उन्होंने उसका तत्त्व समझा, तो मैं समझंगा उनका श्रम सफल हुआ। अपनी मातृभाषा की सेवा का पुण्य तो उन्हें मिलेगा ही
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