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Hatheli Par Rang

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कविता के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करने की स्फूर्ति अपने आरंभिक शिक्षण संस्थान से मिली थी । उस समय लड़कपन में पिताजी से पूछ–पूछकर भरे गए तुकांत शब्द, कभी इतना आवेगमय बना देंगे कि अपनी भावनाओं को कविता से व्यक्त करना होगा, कभी सोचा नहीं था । जिन चीज़ोंµसमाज, व्यक्ति, गरीबी, बेरोजगारी, प्रकृति, प्रेम, आदि को हम अपने नजरिये से देखते–समझते रहे हैं, उसे कविता के रूप में वृहत्तर जनसमुदाय के सामने लाना एक सुखद अनुभूति है । ‘हथेली पर रंग’ काव्य संग्रह में शामिल कवितायें जीवन के इस सोपान पर मेरी समाज व व्यक्ति को पढ़ने की ऐसी ही एक कोशिश का हिस्सा है । आशा है, ये कविताएं आपको पसंद आयेंगी । कमल किशोर पाण्डेय

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