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Bharat Mein Press Evam Press Vidhi

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प्रेस पर नियन्त्रण के लिए ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा लाये गये कानूनों को एक प्रकार से ‘देश’ और ‘अभिव्यिक्ति’ की स्वतन्त्रता के लिए चल रहे लम्बे संघर्ष के विरुद्ध एक ‘राज्य’ का ‘रणनीतिक प्रत्युत्तर’ भी कह सकते हैं । किन्तु इतिहास गवाह है ।, संघर्षशील आवाम के संघर्ष की गति को कभी कोई कानून नहीं रोक पाया है । इससे सबसे बड़ा कारण है कि वह, संघर्ष के दौरान की अगली लड़ाई के लिए नये औजार और नहीं तकनीकें विकसित करता चलता है । दूसरी तरफ, यह देखने राज्य से एक नये कानूनी बन्दिश की प्रक्रिया प्रारम्भ कर देता है ।

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