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Begamo ke aasu

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‘बेगमों के आँसू’ में ख़्वाजा हसन निज“ामी की पैनी लेखन–शैली, भाषा के माधुर्य और भावों की उच्चता का पूर्ण समावेश है । दिल्ली के गदर के उपरान्त मुगल–वंश को कैसी यातनाएँ भोगनी पड़ीं, राजकुमारियाँ और राजकुमार कौड़ी– कौड़ी के लिए कैसे तरसे-इन सब बातों का वर्णन ‘बेगमों के आँसू’ में है । चरित्र–चित्रण अपूर्व, कल्पना–शक्ति, मनोविकार तथा जीवन के अन्य उपचारों का सम्मिश्रण किस खूबी के साथ किया गया है, इसका पाठकों को ‘बेगमों के आँसू’ के पढ़ने से ही अनुभव होगा ।

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