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Aadhunikta Uttar-Aadhunikta Aur Antim Aadmi
यूरोपीय मानव सभ्यता अब आधुनिकता, लौकिकता और सेक्युलर संवेदना से लैस मनुष्य केंद्रित होती है । पर उसका विकास अभी भी सन्तुलित नहीं था । विजित मनुष्य और अविजित प्रकृति के बीच कोई तालमेल ही नहीं था । प्रकृति और धर्म के दुरुपयोग की कहानी एक जैसी है । मैकियावेली तक आते–आते धर्म राज्य का उपकरण बन चुका था । मार्लाे का ‘जीव ऑफ माल्टा’ अपनी अनैतिक यात्रा के लिये तैयार था । मार्लाे, शेक्सपियर और तैमूर लंग के नाटक भावी मनुष्य को अच्छी तरह देख पा रहे थे । नये राज्य और उसकी शक्ति को भी, जो हेजीमनी की तरफ बढ़ते हैं । फ्रांसिस बेकन ने ज्ञान को शक्ति माना था । इच्छा–शक्ति, राजनीतिक शक्ति और बौद्धिक शक्ति से वास्तविक (Real) शक्ति हेजीमनी की अवधारणा में परिणत होती है जो यह समझ और सहमति विकसित करती है कि शासित होना हमारी नियति है । -दुर्गा प्रसाद गुप्त
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