Pandey Shashibushan 'Shitanshu'
पाण्डेय शशिभूषण ‘शीतांशु’ महावीर तीर्थंकर के प्रदेश में जनमे (13 मई 1941) पाण्डेय शशिभूषण ‘शीतांशु’ (पी.एचडी।, हिन्दी, डी. लिट्, भाषाविज्ञान) हिन्दी के ख्यातिलब्ध सैद्धांतिक और सर्जनात्मक आलोचक तो हैं ही, साथ ही साहित्य–विवेक को जाग्रत् करने वाले हिन्दी के पहले समर्थ प्रत्यालोचक भी है । प्रो. ‘शीतांशु’ हिन्दी साहित्यालोचन के एक सौ वर्षों के इतिहास में पहले अर्थान्वेषी आलोचक हैं । उन्होंने भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्र की कुछेक भ्रान्त और गलत स्थापनाओं पर पहली बार उँगली उठायी और उनका संशोधन किया है । वह हिन्दी के सर्वाधिक विशेषज्ञ शैलीविज्ञानी हैं । वह ऐसे अद्यतन भाषाविज्ञानी हैं, जो भाषाविज्ञान में अर्थचिन्तन को महत्त्वपूर्ण मानते हैं । इस दृष्टि से वह पश्चिम में जे.आर. फर्थ की परम्परा से जुड़ते हैं और भारतीय भाषाचिन्तन में भर्तृहरि की अर्थकेन्द्रित परम्परा से । कविता और ललित निबंध–लेखन के साथ–साथ ‘शीतांशु’ स्मृत्यालोचन लिखने वाले समर्थ गद्यकार हैं । इस प्रकार के लेखन में उनके व्यक्तित्व के साथ–साथ साहित्यकारों से उनके सम्पर्क और उनकी परख की जानकारी मिलती है । इसमें साहित्यकारों और उनके साहित्य की अन्तर्कथाएँ सुरक्षित है । इससे साहित्यकारों से उनके गहरे जुड़ाव और उनकी कृतियों से उनके गहरे लगाव का पता चलता है ।
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